जीवंत हो उठा छत्तीसगढ़ के अनगिनत वीर जनजातीय पुरखों का अमर स्वाभिमान….

रायपुर: 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस का यह पावन अवसर केवल स्वतंत्रता का एक वार्षिक पर्व नहीं, बल्कि उन अनगिनत आत्माओं के तर्पण का दिन है जिन्होंने अपनी देह को भारत माता के चरणों में समर्पित कर आज़ादी के वटवृक्ष को सींचा था। जब संपूर्ण देश लाल किले की प्राचीर से तिरंगे को फहरते देख गर्व महसूस कर रहा होता है, तब छत्तीसगढ़ की पावन धरा नवा रायपुर अटल नगर में सीना ताने खड़ा ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ देश के इतिहास में दर्ज उन स्वर्णिम पन्नों की याद दिलाता है जो लंबे समय तक उपेक्षित रहे।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा राज्योत्सव की रजत जयंती के पावन अवसर पर 01 नवंबर 2025 को राष्ट्र को समर्पित यह भव्य संग्रहालय केवल पत्थरों और माटी का ढांचा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी के उन अमर नायकों का जीवंत स्पंदन है जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के क्रूर तंत्र के आगे कभी सिर नहीं झुकाया।

विशेष आलेख : जीवंत हो उठा छत्तीसगढ़ के अनगिनत वीर जनजातीय पुरखों का अमर स्वाभिमान

छत्तीसगढ़ का इतिहास सदैव से संघर्ष, स्वाभिमान और जल-जंगल-जमीन की रक्षा का इतिहास रहा है। 1857 की महान क्रांति में सोनाखान की माटी से क्रांति का शंखनाद करने वाले अमर शहीद वीर नारायण सिंह का बलिदान आज भी जन-जन के हृदय में देशभक्ति की ज्वाला जलाता है। लगभग 50 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित यह संग्रहालय प्रदेश का पहला ऐसा स्मारक है जो विशेष रूप से जनजातीय नायकों के शौर्य को समर्पित है।

विशेष आलेख : जीवंत हो उठा छत्तीसगढ़ के अनगिनत वीर जनजातीय पुरखों का अमर स्वाभिमान

जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में स्थापित यह संग्रहालय 14 से 16 भव्य गैलरियों में विभाजित है, जहाँ लगभग 650 से अधिक अत्यंत सुंदर और जीवंत मूर्तिशिल्प स्थापित किए गए हैं। प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यहाँ 18वीं और 19वीं शताब्दी के उन ऐतिहासिक जनजातीय विद्रोहों को दर्शाया गया है जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी। दर्शक यहाँ हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, तारापुर विद्रोह, लिंगागिरी विद्रोह, कोई विद्रोह, मेरिया विद्रोह, मुरिया विद्रोह, रानी चौरिस विद्रोह, भूमकाल विद्रोह और सोनाखान विद्रोह की शौर्यगाथाओं को साक्षात अनुभव कर सकते हैं। इसके साथ ही भारतीय स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह के लिए दो अलग-अलग विशेष गैलरियाँ बनाई गई हैं।

यह संग्रहालय केवल प्राचीन गाथाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह अत्याधुनिक तकनीक और गहन शोध का एक बेजोड़ उदाहरण है। इतिहास की घटनाओं को व्हीएफएक्स टेक्नोलॉजी, प्रोजेक्शन वर्क और डिजिटल मीडिया के माध्यम से ऐसा रूप दिया गया है कि आगंतुक इतिहास को केवल देखते नहीं, बल्कि उसे महसूस करते हैं। प्रत्येक दीर्घा में डिजिटल बोर्ड लगे हैं, जहाँ आगंतुक अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करके या मॉनिटर और माइक्रोफोन के माध्यम से संबंधित विद्रोह की संपूर्ण जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा आगंतुकों का मार्गदर्शन करने के लिए गाइड्स की व्यवस्था की गई है। संग्रहालय में पर्यटकों के लिए शुद्ध पेयजल, पार्किंग, सीसीटीवी सुरक्षा, प्राथमिक उपचार केंद्र और व्हीलचेयर जैसी सुविधाओं के साथ-साथ शिशुवती महिलाओं के लिए विशेष शिशु देख-रेख कक्ष की भी उत्तम व्यवस्था की गई है।

उद्घाटन के बाद से ही यह संग्रहालय देश-विदेश के पर्यटकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा और ज्ञान का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। छुट्टियों के दिनों में यहाँ प्रतिदिन चार से पाँच हजार और आम दिनों में एक से दो हजार दर्शक पहुँच रहे हैं। महज दस महीनों के भीतर 2.50 लाख से अधिक लोग इसका अवलोकन कर चुके हैं। सर्वाेच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री सूर्यकांत, अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी मैरीकॉम सहित विभिन्न राज्यों के प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी, सेना के जवान और विदेशी पर्यटकों का दल यहाँ आकर छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपरा की सराहना कर चुका है। स्थानीय लोगों के लिए यह संग्रहालय रोजगार के नए अवसर भी लेकर आया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं विभागीय मंत्री श्री रामविचार नेताम के सतत मार्गदर्शन तथा प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा के प्रशासनिक नेतृत्व में बना यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता रहेगा कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने का साहस ही सबसे बड़ी शक्ति है। छत्तीसगढ़ के इन अमर सेनानियों का बलिदान हमें सदैव अपने राष्ट्र की अखंडता और स्वाभिमान की रक्षा करने की प्रेरणा देता रहेगा।